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Showing posts from May, 2016

शनि जयंती

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शनि जयंती ॐ प्रां प्रीं प्रौ स. शनये नमः॥ शनिदेव भाग्यविधाता हैं, यदि निश्छल भाव से शनिदेव का नाम लिया जाये तो व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शनिदेव तो इस चराचर जगत में कर्मफल दाता हैं, जो व्यक्ति के कर्म के आधार पर उसके भाग्य का फैसला करते हैं। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। Read more »

भगवान शिव के 108 नाम

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1-शिव - कल्याण स्वरूप 2-महेश्वर - माया के अधीश्वर 3-शम्भू - आनंद स्वरूप वाले 4-पिनाकी - पिनाक धनुष धारण करने वाले 5-शशिशेखर - सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले 6-वामदेव - अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले 7-विरूपाक्ष - विचित्र आंख वाले( शिव के तीन नेत्र हैं) 8-कपर्दी - जटाजूट धारण करने वाले Read more »

नृसिंह जयंती,नृसिंह अवतार

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नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है कथा नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। Read more »

नवग्रहों के मंत्र ,बीज मंत्र,वेद मंत्र

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किसी ग्रह विशेष का मंत्र उस ग्रह की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ उसका किसी कुंडली में बुरा स्वभाव बदलने में भी पूरी तरह से सक्षम होता है। इसलिए मंत्रों का प्रयोग किसी कुंडली में अच्छा तथा बुरा असर देने वाले दोनो ही तरह के ग्रहों के लिए किया जा सकता है। साधारण हालात में नवग्रहों के मूल मंत्र तथा विशेष हालात में एवम विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए नवग्रहों के बीज मंत्रों तथा वेद मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। नवग्रहों के मंत्र निम्नलिखित हैं : Read more »

मंत्र जप नियम,करमाला

मंत्र जप का मूल भाव होता है- मनन। जिस देव का मंत्र है उस देव के मनन के लिए सही तरीके धर्मग्रंथों में बताए है। शास्त्रों के मुताबिक मंत्रों का जप पूरी श्रद्धा और आस्था से करना चाहिए। साथ ही, एकाग्रता और मन का संयम मंत्रों के जप के लिए बहुत जरुरी है। माना जाता है कि इनके बिना मंत्रों की शक्ति कम हो जाती है और कामना पूर्ति या लक्ष्य प्राप्ति में उनका प्रभाव नहीं होता है। Read more »

राहु -केतु ,राहु - केतु मंत्र

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राहु -केतु के संबंध में पुराणों में कथा आती है कि राहु/केतु एक ही राक्षस था जिसका नाम स्वरभानु था. समुद्र मंथन के समय देवताओं को राक्षसों की सहायता लेनी पड़ी और उसके लिए कहा गया कि समुद्र से जो अमृत निकलेगा उसका रसपान राक्षसों को भी कराया जाएगा. अंत में जब अमृत निकला तब एक लाईन में देवता तो दूसरी लाईन में राक्षसों को बिठाया गया. विष्णु जी जानते थे कि राक्षसों को अमृत पिलाते ही वह अमर हो जाएंगे और फिर अत्यधिक उत्पात मचा देगें. Read more »

बगलामुखी कवच-पाठ

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बगलामुखी कवच-पाठ | शिरो मेंपातु ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं पातुललाटकम । सम्बोधनपदं पातु नेत्रे श्रीबगलानने ।। १ श्रुतौ मम रिपुं पातु नासिकां नाशयद्वयम् । पातु गण्डौ सदा मामैश्वर्याण्यन्तं तु मस्तकम् ।। २ देहिद्वन्द्वं सदा जिह्वां पातु शीघ्रं वचो मम । कण्ठदेशं मनः पातु वाञ्छितं बाहुमूलकम् ।। ३ कार्यं साधयद्वन्द्वं तु करौ पातु सदा मम । मायायुक्ता तथा स्वाहा, हृदयं पातु सर्वदा ।। ४ अष्टाधिक चत्वारिंशदण्डाढया बगलामुखी । रक्षां करोतु सर्वत्र गृहेरण्ये सदा मम ।। ५ Read more »

माँ बगलामुखी आरती

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जय पीताम्बर-धारिणि जय सुखदे वरदे, मातर्जय सुखदे वरदे ! भक्त-जनानां क्लेशं, भक्त-जनानां क्लेशं सततं दूर करे ।। जय देवि, जय देवि ! ।। १ Read more »

बगलामुखी चालीसा

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दोहा सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज।। कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज।। चौपाई जय जय जय श्री बगला माता। आदिशक्ति सब जग की त्राता।। बगला सम तब आनन माता। एहि ते भयउ नाम विख्याता।। Read more »

बगलामुखी की कथा.

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माँ बगलामुखी की कथा देवी बगलामुखी जी के संदर्भ में एक कथा बहुत प्रचलित है जिसके अनुसार एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ , जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच जाता है और अनेकों लोक संकट में पड़ गए और संसार की रक्षा करना असंभव हो गया . यह तूफान सब कुछ नष्ट भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था , जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए . Read more »

बगलामुखी पूजन,बगलामुखी जयंती,बगलामुखी मंत्र

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मां बगलामुखी पूजन माँ बगलामुखी की पूजा हेतु बगलामुखी जयंती के दिन प्रात : काल उठकर नित्य कर्मों में निवृत्त होकर , पीले वस्त्र धारण करने चाहिए . साधना अकेले में , मंदिर में या किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर की जानी चाहिए . पूजा करने के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने के लिए आसन पर बैठें चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवती बगलामुखी का चित्र स्थापित करें . इसके बाद आचमन कर हाथ धोएं। आसन पवित्रीकरण , स्वस्तिवाचन , दीप प्रज्जवलन के बाद हाथ में पीले चावल , हरिद्रा , पीले फूल और दक्षिणा लेकर संकल्प करें . इस पूजा में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवशयक होता है . Read more »

बगलामुखी जयंती,पीताम्बरा देवी

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बगलामुखी जयंती वैसाख माह को पवित्र और शुद्ध मास माना जाता है। इस माह में सारे शुभ काम किये जाते हैं। यह इस मास की विषेषता है कि शुक्ल पक्ष के द्वितीया को परशुराम जयंती , तृतीया को अक्षय तृतीया , त्रेता युग का प्रारंभ इसी दिन हुआ था। चतुर्थी को गणेश चतुर्थी , पंचमी को आदि शंकराचार्य जयंती , षष्ठी को रामानुचार्य जयंती , सप्तमी को गंगा सप्तमी , अष्टमी को बगलामुखी जयंती , नवमी को जानकी जयंती , त्रयोदशी को नरसिंह जयंती और पूर्णिमा को भगवान बुद्ध की जयंती होती है। Read more »