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Showing posts from September, 2016

कालीमाता की आरती

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कालीमाता की आरती मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे। पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।। जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।2।। Read more »

श्री काली चालीसा

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श्री काली चालीसा ॥॥दोहा ॥॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥1॥ Read more »

महाकाली की उत्पत्ति

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ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा काली महाकाली कालिके परमेश्वरी । सर्वानन्दकरी देवी नारायणि नमोऽस्तुते ।। ॐ क्रीं काल्यै नमः श्रीमार्कण्डेय पुराण एवं श्रीदुर्गा सप्तशती के अनुसार काली मां की उत्पत्ति जगत जननी मां अम्बा के ललाट से हुई थी। दक्षिणा काली , शमशान काली , मातृ काली और महाकाली , मां काली के रूप हैं । माता ने महिषासुर , चंड , मुंड , धूम्राक्ष , रक्तबीज , शुम्भ , निशुम्भ आदि राक्षसों के वध किए थे। Read more »

आश्विन कृष्ण एकादशी,इंदिरा एकादशी ,पितृ पक्ष एकादशी

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धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान ! आश्विन कृष्ण एकादशी का क्या नाम है ?  भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी है। यह एकादशी पापों को नष्ट करने वाली तथा पितरों को अ ‍ धोगति से मुक्ति देने वाली होती है।   इसके सुनने मात्र से ही वायपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह एकादशी हमेशा श्राद्ध पक्ष के भीतर ही आती है इसलिए इसका व्रत करने का फल पितरों की शांति से जोड़ा गया है। लेकिन इसके अलावा भी इंदिरा एकादशी को करने के अनेक फायदे हैं। प्राचीनकाल में सतयुग के समय में महिष्मति नाम की एक नगरी में इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करते हुए शासन करता था। वह राजा पुत्र , पौत्र और धन आदि से संपन्न और विष्णु का परम भक्त था। एक दिन जब राजा सुखपूर्वक अपनी सभा में बैठा था तो आकाश मार्ग से महर्षि नारद उतरकर उसकी सभा में आए। राजा उन्हें देखते ही हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और विधिपूर्वक आसन व अर्घ्य ...